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डेंगू का घरेलू उपचार (Dengue Home Remedies)

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डेंगू का घरेलू उपचार (Dengue Home Remedies) डेंगू एडीज मच्छर (Aedes Mosquito) द्वारा फैलने वाली बीमारी है जो कि हाल के समय में तेजी से बढ़ रही है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी (Clean Water) में पनपते हैं। डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों में तेज दर्द (Pain in Joints) होता है तथा सिर में भी दर्द (Headache) काफी तेज होता है। बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी फैलता है। डेंगू के दौरान यदि तुरंत उपचार न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है, क्योंकि डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स (Platelates) का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरता है जिससे कई बार अंदरूनी रक्त्स्त्राव (Internal Bleeding) होने की संभावना भी रहती है। डेंगू से बचाव के लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर डेंगू से बचाव संभव है। आइए आपको भी बताते हैं कि कौन से घरेलू उपाय आपको डेंगू से बचा सकते हैं- डेंगू के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Dengue) धनिया पत्ती (Coriander Leaves) डेंगू के बुखार से राहत के लिए धनिया पत्ती के जूस को टॉनिक के रू...

डेंगू (Dengue)

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डेंगू (Dengue) डेंगू, मादा एडीज (Female Aedes) मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। मरीज में अगर जटिल तरह के डेंगू का एक भी लक्षण दिखाई दे तो उसे जल्दी - से - जल्दी डॉक्टर के पास ले जाएं।  डीएचएफ ( DHF - Dengue Hemorrhagic Fever) और डीएसएस (DSS - Dengue Shock Syndrome) बुखार डेंगू के दो प्रकार हैं जिनमें प्लेटलेट्स (Platelets) काफी कम हो जाते हैं, जिसके कारण शरीर के जरूरी अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। प्लेटलेट्स - डेंगू में महत्वपूर्ण कारक (Platelets Count in Dengue ) डेंगू से कई बार मल्टी - ऑर्गन फेल्योर (Multi Organ Failure) भी हो जाता है। डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स शरीर में रक्तस्राव (Bleeding) रोकने का काम करती हैं। प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में जाना चाहिए और जरूरी जांच कराने चाहिए। यहां यह ध्यान रखने योग्य बात है कि डेंगू के प्रत्येक मरीज को अस्पताल में  भर्ती की आवश्यकता ...

हीट स्ट्रोक के घरेलू नुस्खे (Home Remedies For Heat Stroke)

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हीट स्ट्रोक के घरेलू नुस्खे (Home Remedies For Heat Stroke) अगर तुरंत इलाज न हो तो हीट स्ट्रोक यानि लू लगना जानलेवा भी हो सकता है। ज्यादा गर्मी से शरीर में थकावट महसूस होना और लू लगना (हीट स्ट्रोक) दोनों में अंतर है। हीट स्ट्रोक या लू लगना गंभीर स्थिति है। तेज धूप या तेज तापमान में काफी देर तक सनलाइट के संपर्क में रहने से शरीर का तापक्रम 37 डिग्री सेल्सियस (सामान्य) से कहीं अधिक हो जाता है। अगर शरीर का तापक्रम 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है, जिसमें शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग डैमेज हो जाते हैं। तेज सिरदर्द, सांस तेजी से लेना, दिल की धड़कन तेज होना, त्वचा लाल हो जाना, चक्कर आना, उल्टी, काफी पसीना आना जैसे लक्षण जब दिखने लगे तो समझ जाइए कि यह हीट स्ट्रोक या लू का अटैक है। हीट स्ट्रोक या लू लगने के बाद मरीज को तुरंत मेडिकल केयर में रखना चाहिए। वैसे लू से बचने के कई घरेलू इलाज हैं, लेकिन लू लगने के बाद अगर शरीर का तापक्रम 104 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा है और शरीर में पानी की कमी है तो बिना अस्पताल में भर्ती किए इसका कोई इलाज नहीं है। गर्मी में हीट ...

लू लगना (Heat Stroke)

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लू लगना (Heat Stroke) विवरण कब लगती है लू? (Cause of Heat Strock) लू  लगने के लक्षण (Symptoms of Heat Strock) लू लगने के जोखिम (Risk Factors of Heat Storkes) लू लगने पर प्राथमिक उपचार (First Aid for Heat Strokes in Hindi) विवरण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है लू लगना। अंग्रेजी भाषा में इसे हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) और सनस्ट्रोक (Sun Stroke) भी कहते हैं। गर्मी में उच्च तापमान में ज्यादा देर तक रहने से या गर्म हवा के झोंकों से संपर्क में आने पर लू (Loo) लगने का डर अधिक होता है। कब लगती है लू? (Cause of Heat Strock) गर्मी में शरीर के द्रव (Body Fluids) सूखने लगते हैं। शरीर से पानी और नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। लू लगने पर शरीर में गर्मी, खुश्की और थकावट महसूस होती है। इसमें गर्मी के कारण होने वाली और कई मामूली बीमारियां भी शामिल होती हैं जैसे कि हीट एडेमा (शरीर का सूजना), हीट रैश, हीट क्रैम्प्स (शरीर में अकड़न) और हीट साइनकॉप (बेहोशी) आदि। चिकित्सक शरीर के तापमान को 105 डिग्री फारेनहाइट से अधिक रहने पर और शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम मे...

A Complete guide on autism in hindi

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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस स्वलीनता (ऑटिज़्म) क्या है? आत्मविमोह (Autism)  के  लक्षण स्वलीनता (ऑटिज़्म) के कारण स्वलीनता (ऑटिज़्म) संचार स्वलीनता (ऑटिज़्म) के लिए चिकित्सा Donate us to promote our services  2 अप्रैल: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (विश्व स्वपरायणता जागरूकता दिवस, World Autism Awareness Day) दुनिया भर में 2 अप्रैल  2014 को मनाया गया. इसका उद्देश्य ऑटिज्म से ग्रस्‍त उन बच्‍चों और बड़ों के जीवन में सुधार के हेतु कदम उठाना और उन्‍हें सार्थक जीवन बिताने में सहायता देना है. वर्ष 2014 में मनाया जाने वाला विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस क्रम में 7वां है. नीला रंग ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में दो अप्रैल के दिन को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था. पहला विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2 अप्रैल 2008 को मनाया गया था. इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्‍यादा संभावना है. इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका ज्ञात नहीं है, लेकिन जल्‍दी निदान ह...

स्वलीनता (ऑटिज़्म) के लिए चिकित्सा

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स्वलीनता (ऑटिज़्म) के लिए चिकित्सा ऑटिज़्म को शीघ्र पहचानना और मनोरोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श ही इसका सबसे पहला इलाज है। ऑटिज़्म के लक्ष्ण दिखने पर मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, या प्रशिक्षित स्पेशल एजुकेटर (विशेष अध्यापक) से सम्पर्क करें। ऑटिज़्म एक आजीवन रहने वाली अवस्था है जिसके पूर्ण उपचार के लिए कोई दवा की खोज ज़ारी है, अतः इसके इलाज के लिए यहाँ-वहाँ न भटकें व बिना समय गवाएं इसके बारे में जानकारी प्राप्त करें। ऑटिज़्म एक प्रकार की विकास सम्बंघित बीमारी है जिसे पूरी तरह तो ठीक नहीं किया जा सकता, परन्तु सही प्रशिक्षण व परामर्श के द्वारा रोगी को बहुत कुछ सिखाया जा सकता है, जो उसे अपने रोज के जीवन में अपनी देखरेख करने में मदद करता है। ऑटिज़्म से ग्रसित 70% वयक्तियों में मानसिक  मंदता पायी जाती है जिसके कारण वह एक सामान्य जीवन जीने में पूरी तरह से समर्थ नहीं हो पाते, परन्तु यदि मानसिक मन्दता बहुत अघिक न हो तो ऑटिज़्म से ग्रसित व्यक्ति बहुत कुछ सीख पाता है। कभी-कभी इन बच्चों में कुछ ऐसी काबिलियत भी देखी जाती हैं जो सामान्य वयक्तियों की समझ व पहुच से दूर होती हैं। ऑटिज़्म...

दोहराव युक्त व्यवहार

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दोहराव युक्त व्यवहार स्टीरेओटाईपी  एक निरर्थक प्रतिक्रिया है, जैसे हाथ हिलाना, सिर घुमाना या शरीर को झकझोरना आदि। बाध्यकारी व्यवहार  का उद्देश्य नियमों का पालन करना होता है, जैसे कि वस्तुओं को एक निश्चित तरह की व्यवस्था मे रखना। समानता  का अर्थ परिवर्तन का प्रतिरोध है, उदाहरण के लिए, फर्नीचर के स्थानांतरण से इंकार। अनुष्ठानिक व्यवहार  के प्रदर्शन मे शामिल हैं दैनिक गतिविधियों को हर बार एक ही तरह से करना, जैसे एक सा खाना, एक सी पोशाक आदि। यह समानता के साथ निकटता से जुडा है और एक स्वतंत्र सत्यापन दोनो के संयोजन की सलाह देता है। प्रतिबंधित व्यवहार  ध्यान, शौक या गतिविधि को सीमित रखने से संबधित है, जैसे एक ही टीवी कार्यक्रम को बार बार देखना। आत्मघात  (स्वयं को चोट पहुँचाना) से अभिप्राय है कि कोई भी ऐसी क्रिया जिससे व्यक्ति खुद को आहत कर सकता हो, जैसे खुद को काट लेना। डोमिनिक एट अल के अनुसार लगभग ASD से प्रभावित 30 % बच्चे स्वयं को चोट पहँचा सकते हैं। कोई एक खास दोहराव आत्मविमोह से संबधित नहीं है, लेकिन आत्मविमोह इन व्यवहारों के ल...